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بابا بُلھے شاھ -बाबा बुल्लेह शाह

पढ़ पढ़ किताबां इल़म दीयां तु नाम रख लिया क़ाज़ी.
हथ विच फढ़ के तलवार नाम रख लिया ग़ाजी.
मकके मदीने घुम आया ते नाम रख लिया हाज़ी.
ओ बुललेया हासल की कीता? जे तुं रब ना कीता राजी..[बाबा बुललेह शाह]

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