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जब ग्रह खुद भी बन जाते हैं बलि के बकरे


इल्म ज्योतिष लाल किताब के सभी प्रेमियो को नजूमी की तरफ से नमस्कार


आज हम बात करेंगे कुर्बानी के बकरे की

लाल किताब में कुर्बानी के बकरे का यह बहुत ही अनोखा नियम है जो कि किसी भी अन्य  पद्धति में देखने को नहीं मिलता। कुर्बानी के बकरे से मतलब है जब कोई ग्रह अपने दुश्मन ग्रह से पीड़ित होता है तो वह अपना मन्दा प्रभाव  दूसरे ग्रह के फल के अशुभ हो जाने से प्रकट होता है जिस ग्रह के द्वारा वह अपना अशुभ प्रभाव प्रकट करता है उसे लाल किताब ज्योतिष में कुर्बानी का बकरा का माना  है ।
उधारण की तौर पर जिस कुंडली में शनि सूरज से पीड़ित हो उस कुंडली में शुक्र (पत्नि का कारक )के फल मन्दे मिलेंगे यानी कि जातक की पत्नी की सेहत अच्छी ना होगी या संबन्ध अच्छे न रहेंगे - यहां पर शुक्र कुर्बानी का बकरा माना जाएगा -जैसे उदाहरण के तौर पर लाल किताब में लिखा है सूरज खाना नंबर 6और सनी खाना नंबर 12 में हो तो औरत पर औरत मरती जाए ।

इसी तरह से सभी ग्रहों ने अपने बचाव के लिए किसी न किसी ग्रह का सहारा लिया हुआ है। आएं इसे अध्ययन करने की कोशिश करते हैं
★बुध  ने अपने बचाव के लिए शुक्र से दोस्ती कर रखी है बुध अपना दुष्प्रभाव शुक्र के जरिए प्रगट करेगा यानी अपने दोस्त शुक्र पर बला डाल देगा ।

★मंगल पीड़ित होने पर अपना मन्दा फल केतु द्वारा प्रकट करेगा यानी जातक की जो औलाद है वह मंदी होगी या वह बच्चा बीमार रहेगा औलाद होकर मर जाना मंगल बद की निशानी है ।

★आगे बात करते हैं शुक्र की शुक्र पीड़ित होने पर अपना दुष्प्रभाव चंद्र के द्वारा प्रकट करेगा यानि की कुंडली में अगर चंद्र और शुक्र टकराव पर हो तो जातक की माता की नजर कमजोर होगी या मां की सेहत अच्छी ना होगी या मां बेटे दोनों में वैचारिक मतभेद कटुता रहे।

★बृहस्पति पीड़ित होने पर  दुष्प्रभाव केतु के द्वारा ज़ाहिर  करेगा- माना कि किसी के कुंडली में बृहस्पति खाना नंबर 5 में हो और केतु भी किसी घर में हो तो बृहस्पती  के पीड़ित होने पर यानी खाना नंबर 5 में बृहस्पति मन्दा होने पर औलाद पर  जोकि खाना नंबर 5 का कारक है पर कोई अशुभ प्रभाव  तो नहीं होगा पर खाना नंबर 6 जो केतू अपना घर है  खाना नंबर 6  संबंधित रिश्तेदार चीजें आदि पर अपना दुष्प्रभाव प्रकट  करेगा यानी ऐसी हालत में जातक के मामा को परेशानी रहे ।

★आगे बात करते हैं सूरज की सूरज भी मुसीबत के वक्त अपना मंदा प्रभाव केतू के द्वारा प्रकट करेगा ।

★चंद्रमा अगर मंदा हो तो अपना प्रभाव अपने दोस्त ग्रहों 【बृहस्पति सूरज मंगल 】के द्वारा दुष्प्रभाव प्रकट  करेगा।

★ आगे बात करते हैं सनी की अगर सनी पीड़ित मंदा हो तो ऐसे में सनी ने दुश्मन से बचाव के लिए राहु केतु दोनों को सनीचर ने अपना एजेन्ट बनाया है सनी की जगह फौरन किसी दूसरे की कुर्बानी देते हैं यानी राहु केतु जो भी कुंडली में ग्रह उनकी नजर में हो या कमजोर हो उसकी कुर्बानी ले लेगा ।

★राहु केतु खुद ही मन्दे हो तो इन दोनों के हालात इन दोनों ग्रहों के अपने ही संबंधित चीजों से रिश्तेदार द्वारा मन्दा प्रभाव प्रकट होगा यानी कि राहु केतु अपना पाप खुद ही निभाते हैं यानि खुद की कुर्बानी दे देते हैं-मन्दे हो जाते हैं।

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लाल किताब अनुसार कुंडली में शुभ और अशुभ ग्रह


इल्मे ज्योतिष लाल किताब में आप सभी का स्वागत है । आप सभी को नजूमी की तरफ से नमस्कार।
आज बात करेंगे अकेले बैठे हुए ग्रहों के शुभ और अशुभ प्रभाव की- लाल किताब ज्योतिष के अनुसार कोई भी ग्रह किसी  भी खाना नंबर में अकेला बैठा हो और किसी भी ग्रह के दृष्टि में ना हो तो ऐसा ग्रह शुभ प्रभाव वाला होगा।
आएं अब जानने की कोशिश करते हैं कि अकेले अकेले बैठे ग्रहों की हालत क्या होगी। कौन सा ग्रह केवल अकेला ही बैठा हो तो वह क्या प्रभाव देगा ।

√बृहस्पति अगर अकेला बैठा हो कभी मंदा असर ना देगा

√सूरज अकेला बैठा हो आदमी खुद मेहनत करके अमीर बन जाएगा

√चंद्रमा अकेला बैठा हो अपनी दया और नरमी से फांसी तक माफ करवा लेने की हिम्मत रखेगा -अपने खानदान को नष्ट नहीं होने देगा यानी कि अपने कुल रक्षक होगा।

√शुक्र अकेला हो कभी मन्दा ना होगा यदि होगा तो किसी के साथ होने पर ही मन्दा होगा

√मंगल अकेला हो तो चिड़िया घर का कैदी  बकरियों में पला शेर रोका यानी ऐसा मंगल कभी भी आप हमला नहीं करेगा मंदा असर नही देगा ।

√बुध अगर अकेला बैठा हो तो इसका फल थोड़ा सा हट कर होगा ऐसा जातक बहुत ही अव्वल दर्जे का लालची और देश प्रदेश में खाली चक्र लगाने वाला होगा

√ शनिचर अगर अकेला बैठा हो तो अकेले सूरज के साथी खाली बुध का काम देगा ।

√राहु अकेला बैठा हो तो हर तरह से आपकी रक्षा करेगा पर माली (धन)हालात की शर्त न  होगी ।

√केतु अगर अकेला बैठा हो तो हर समय  राहु के इसारे पर चलेगा -जैसा राहु कहेगा वैसा ही केतू ही करेगा ।

जब दृष्टि की नजर से बाहर कोई भी ग्रह किसी भी खाना नंबर में अकेला बैठा हो तो उसके चंगे मन्दे असर के लिए हम नीचे दिए  जानकारी के हिसाब से देखेंगे|

★बृहस्पति अकेला खाना नंबर 6 7 10 में अमूमन मंदा असर देने वाला होगा।
खाना नंबर 1 2 3 4 5 8 9 11 12 में अमूमन नेक असर देने वाला होगा।

★सूरज अकेला खाना नंबर 6 7 10 में अमूमन मन्दे असर का होगा खाना नंबर 1 2 3 4 5 8 9 11 12 में नेक असर देने वाला होगा ।

★चंद्रमा खाना नंबर 6 8 10 11 12 में मन्दे  असर का होगा -खाना नंबर 1 2 3 4 5 7 9 में अमूमन नेक असर देगा।

★शुक्र खाना नंबर 1 6 9 में अमूमन मन्दा  असर देने वाला होगा
खाना नंबर 2 3 4 5 7 8 10 11 12 में नेक असर का होगा ।

★मंगल खाना नंबर 4 खाना नंबर 8 में अमूमन बद(बुरा) असर देने वाला होगा पर खाना नंबर 1 2 3 5 6 7 9 10 11 12 में नेक असर देने वाला होगा ।


★बुध खाना नंबर 3 8 9 10 11 12 में अमूमन मन्दा असर देने वाला होगा  पर हमेशा मंदा ना होगा- खाना नंबर 1 2 4 5 6 7 में नेक असर  देने वाला होगा।

★ शनिचर खाना नंबर 1 4 5 6 में मन्दे असर का होगा और खाना नंबर 2 3 7 8 9 10 11 12 में अमूमन नेक मायने  का होगा ।

★राहु खाना नंबर 1 2 5 7 आठ नौ दस 11 12 में मंदे असर का होगा और खाना नंबर 3 4 6 में अमूमन नेक असर देने वाला होगा ।

★केतु खाना नंबर 3 4 5 6 और आठ में मन्दा असर देने वाला होगा और खाना नंबर 1 2 7 9 10 11 12 में अमूमन नेक  प्रभाव देने वाला होगा।

■अकेले ग्रह से मतलब है कि वह ग्रह  किसी और ग्रह की किसी तरह से कोई दृष्टि में  ना हो ना ही कोई उसे ग्रह देख रहा हो ऐसे हालात में वह  हर तरह से अकेला बैठा माना जायेगा।

■अमूमन मन्दे असर प्रभाव से मतलब जब ग्रह  किसी ऐसे खाना नंबर में बैठा हो जहां वह नीच माना गया  हो (जैसे की सूरज 1 में दोस्त् मंगल मालिक सूरज का पक्का घर में उच्च और खाना नंबर 7 दुश्मन शुक्र का घर में नीच )। अपने दुश्मन ग्रह के घर में बैठा हो और दुश्मन  ग्रहों की दृष्टि पढ़ रही हो ।


■अमूमन  नेक असर से मतलब  होगा कि- जहां वह ग्रह अपने पक्के खाना नंबर में बैठा हो या  किसी दोस्त ग्रह की खाना नंबर में बैठा हो । या जो खाना नंबर  उस ग्रह के लिए उच्च मुक़र्रर किये  है जैसे कि खाना नंबर 1 मंगल के लिए खाना नंबर 5 सूरज के लिए बृहस्पति के लिए 5  में बैठा हो ।
धन्यवाद

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लाल किताब में ग्रहों की दृष्टियां


इल्मे ज्योतिष लाल किताब में दृष्टि (नज़र)का बहुत ही महत्व है ।
लाल किताब ज्योतिष में ग्रह की दृष्टि या भाव की दृष्टि वैदिक पद्धति से भिन्न है ।लाल किताब में लिखा है
1 7 घर, 4 10 पूर्ण दृष्टि होती है ।
5 9, 3 11 आधी दृष्टि होती है ।
8 6, 2 12 बैठे नजर चौथाई रखते हैं।
केतु  राहु बुध की नाली, लेख जुदा ही रखते हैं।।
इसे अगर हम ध्यान से पढ़े तो पता चलता है कि
खाना नंबर 1 खाना नंबर 7 को 100 पर्सेंट की नजर से देखता है ।
खाना नंबर 4 खाना नंबर 10 को 100 पर्सेंट की नजर से देखता है ।
खाना नंबर 3 50% की नजर से खाना नंबर 9 खाना नंबर 11 को देखता है ।
खाना नंबर 5 50% नजर से खाना नंबर 9 को देखता है।
खाना नंबर दो 25% की नजर से खाना नंबर 6 को देखता है ।
खाना नंबर से 25% की नजर से खाना नंबर 12 को देखता है ।
खाना नंबर 8 25% की नजर से खाना नंबर 12 को देखता है ।
100%की दृष्टि नज़र की हालत में एक ग्रह दूसरे के ज्यादा  नज़दीक आ जाते हैं या मिल जाते हैं ।
50% की नजर में इनके बीच का फासला आधा हो जाता है या दोनों की आधी ताकत आपस में मिल जाती है।
25% की नजर में इनके बीच का फासला 3/4  रह जाता है और 1/4 ताकत आपस में मिल जाती है।
इसके अलावा कुछ विशेष नियम है जिसके बारे में लाल किताब में इस तरह जिक़र है ।
घर उल्टा 8 दूजे होवे ,ना देखें पांच 11 घर ।
बुध 12-6 , 9-3 मारे ,सनी 6 से दूसरा घर।।
इसका अर्थ है खाना नंबर 8 उल्टा देखकर खाना नंबर 2 को देखता है और सौ प्रतिशत प्रभाव डालता है।
अगर बुध खाना नंबर 12 में हो तो अपना प्रभाव खाना नंम्बर 6 में भी डालता है ।
बुध अगर खाना नंबर 9 में हो अपना प्रभाव खाना नंबर 3 में भी डालता है ।
सनी अगर खाना नंबर 6 में हो तो अपना प्रभाव दूसरे घर में भी डालता है ।
साधारण तौर पर कुंडली के 7 9 10 11 12 में स्थित ग्रह अपनी दृष्टि नही रखते।
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लाल किताब अनुसार अंधी कुंडली- आधी अन्धी कुंडली धर्मी कुंडली नाबालिग कुंडली क्या होती है



इल्मे ज्योतिष लाल किताब के सभी प्रेमियों को नजूमीजी  की तरफ से नमस्कार ।
आज हम बात करेंगे ग्रहों की परिभाषा व् इल्मे ज्योतिष लाल किताब में क्यों कुंडलिया की प्रकार बताई गई है।
लाल किताब में इस तरह जिक्र है ।
*अंधी कुंडली
अगर खाना नंबर 10 में दो आपसी शत्रु या नीच ग्रह बैठे हो तो ऐसे कुंडली अंधी कुंडली की गिनती में आती है। यानि ऐसी कुंडली में जो ग्रह बैठे होते हैं वह अंधे ग्रहों की तरह अपना फल देते हैं यानी पूरी तरह फल देने में नाकामयाब रहते हैं।
*अंधराती कुंडली
आइए अब हम बात करें दूसरी प्रकार की कुंडली कि जिससे लाल किताब में अंधराती कुंडली बोला गया है। जब सूरज खाना नंबर 4 में हो और सनी खाना नंबर 7 में हो तो ऐसी कुंडली आधी अंधी होती है।
*धर्मी कुंडली
और तीसरे प्रकार की कुंडली की बात करें जिन्हें लाल किताब में धर्मी कुंडली के नाम से याद किया है  शनि राहु केतु तीनो ही पापी ग्रह की गिनती में आते हैं जब राहु केतु खाना नंबर 4 में पाप छोड़ने की चंद्र के सामने कसम उठाते हैं और शनिचर खाना नंबर 11 में बृहस्पति को साक्षआत समझकर राहु केतु के पैदा किए गए पापों का निर्णय करता है अगर राहु केतु ख़ाना नंबर 4 या चंद्र के साथ किसी भी घर में हो और अगर सनी खाना नंबर 11 में या बृहस्पति के साथ किसी भी घर में हो तो उस कुंडली में हो तो पापी ग्रह का बुरा प्रभाव ना होगा । पाप ग्रह जो हैं वह भी धर्मी के जैसा फल देंगे यानी बुरा फल ना देंगे अपनी अशुभता छोड़ जाते हैं।
साथी ग्रह कुंडली
आइए अब हम आगे बात करें साथी ग्रह वाली कुंडली की जब कोई तरह आपस में अपने निर्धारित राशि ऊंच-नीच घर की राशि आपने पक्के घरों में दल बदलकर बैठ जाए तो साथी ग्रह कहलाते हैं उदाहरण के तौर पर सूरज अपने घर की राशि का नंबर 5 में है और सनी अपने घर की राशी खाना नंबर 10 में है अब सूरज खाना नंबर 10 में और सनी ख़ाना नंबर 5 में हो तो दोनों ग्रह आपस में साथी ग्रह बन गए यानी दोनों एक दूसरे के घर में बदल कर बैठ गए गए ऐसे में दोनों में जो दुश्मनी भाव था वह खत्म हो गया ।
बिलमुक़ाबिल कुंडली (आमने सामने)
  आइए अब हम आगे बात करें बिलमुक़ाबिल कुंडली की यानी कि आमने सामने की कुंडली ।
दो मित्र ग्रह हो और जब दोनों में से किसी एक की जड़ में/ पक्के घर में उनका कोई शत्रु बैठ जाए तो उन दोनों ग्रहों की आपसी मित्रता में काफी कमी आ जाती है उनमें दुश्मनी का भाव पैदा हो जाता है ।उदाहरण के तौर पर सूरज अगर खाना नंबर 7 में बैठ जाए जो कि शुक्र की तुला राशि है और बुध जो कि शुक्र का मित्र है और सूरज का भी मित्र है में दुश्मनी का भाव पैदा हो जाएगा।यानि की सूरज के शत्रु शुक्र के घर बैठ जाने के कारण बुध जो की सूरज और शुक्र दोनों का मित्र है पर अब इस स्थिति में बुध व् शुक्र दोनों आपस में शत्रु बन गए दोस्ती का भाव जाता रहा।
*नाबालिग कुंडली
लाल किताब ज्योतिष में अगर कुंडली में केंद्र स्थान यानी कि खाना नंबर 1 4 7 10 खाली हो या इन खाना नंबर में सिर्फ पापी ग्रह बैठे हैं यानी की शनि राहु या केतु
*शुक्र के साथ बृहस्पत या सूर्य या चंद्र जा  राहु बैठा हो
*सनी के साथ सूरज या  चंद्र या मंगल
* राह के साथ सूरज या चंद्र या मंगल या बृहसप्त
*केतु के साथ सूरज या चांद जा मंगल हो या
*खाना नंबर 1 7 4 10 में बुध अकेला बैठा हो तो ऐसी कुंडली को नबालिक माना जाता है।
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नाबालिक ग्रहों वाली कुंडली को देखने का तरीका

अगर कुंडली नाबालिग ग्रहों वाली हो तो ऐसे ग्रहों वाले कुंडली को देखने का एक अलग ही तरीका है ।
तरीका नीचे लिखा हुआ है

पहले साल के लिए खाना नंबर 7 और खाना नंबर 7 में बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव होगा।

दूसरे साल खाना नंबर 4 और खाना नंबर 4 में बैठे ग्रह का प्रभाव होगा ।

तीसरे साल खाना नंबर 9 और उसमें बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव होगा ।

चौथे साल खाना नंबर 10 और उसमें बैठे ग्रह का प्रभाव होगा ।

पांच में साल खाना नंबर 11 और उसने बैठे ग्रहों का प्रभाव होगा ।

छठे साल खाना नंबर 3 व् खाना नंबर 3 में बैठे ग्रह का प्रभाव होगा ।

सातवें साल खाना नंबर दो और दो मैं बैठे हुए ग्रह का प्रभाव होगा ।

आठवें साल खाना नंबर 5 और उसने बैठे हुए ग्रह का प्रभाव होगा ।

9वें साल खाना नंबर 6 और उसमें बैठे हुए ग्रह का प्रभाव होगा ।

दसवें साल खाना नंबर 12 और उसमें बैठे हुए ग्रह का प्रभाव होगा ।

11वें साल खाना नंबर 1 व् 1 में बैठे हुए ग्रह का प्रभाव होगा ।

12 वें साल खाना नंबर आठ और उसने बैठे हुए ग्रह का प्रभाव होगा।।
      अगर किसी ख़ाना नंबर का फल देखना हो और  कुंडली में और उस घर में कोई ग्रह न हो तो उस घर का फैसला उस घर की राशि के मालिक से किया जाएगा ।

* अगर सूरज खाना नंबर 1 5 11 में या बुध  खाना नंबर 6 में हो तो कुंडली बाल होगी।

* वर्षफल की कुंडली में जो ग्रह सूरज से पहले लगन में आ जाए वह ग्रह बालिग गिना जायेगा।

* वर्षफल के अनुसार सूरज लग्न में आने के बाद सभी के सभी ग्रह यानि पूरी  कुंडली बालिग ग्रहों की मानी जाएगी।।
धन्यवाद

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इल्में ज्योतिष लाल किताब परिचय

राशि छोड़ नक्षत्र  भूलाया ना ही कोई पंचाग लिया ।मेष राशि खुद लग्न को गिनकर 12 पक्के घर मान लिया।। यानी कि लाल किताब में लग्न की राशि को कोई महत्व नहीं दिया लगन चाहे जो भी हो लाल किताब की हर कुंडली का लगन मेष राशि से शुरू होता है।। क्योंकि जैसे वैदिक में गणेश धनेश सुखेश की कल्पना थी उसको मिटाकर खाना नंबर 1 मेष राशि से शुरुआत की यह ज्योतिष की सरलता का प्रतीक है ताकि आम आदमी भी सरल तरीके से इस इल्म  को समझ सके हालांकि ऐसा नहीं है कि लाल किताब में राशि को कोई महत्व नहीं दिया पर सरलता के लिए खाना नंबर 1 में मेष राशि को मानकर पूरे 12 घर मान लिए गए जिसमें मेष लग्न हुआ और और आखिर का खाना नंबर 12 मीन राशि हुआ।।।

इल्मे ज्योतिष लाल किताब में हर ग्रह किसी ने किसी खाना नंबर का कारक माना है । जिसे इल्मे ज्योतिष लाल किताब में  हर ग्रह को उसके पक्का घर के नाम से याद किया है और नीचे उसकी डिटेल्स दी गई है ।।                       

*खाना नंबर 1 पक्का घर है सूरज का।
*खाना नंबर दो पक्का घर है ब्रस्पति का
*खाना नंबर 3 पक्का घर है मंगल का ।
*खाना नंबर 4 पक्का घर है चंद्र का। 
*खाना नंबर पांच पक्का घर है बृहस्पति ।
*खाना नंबर 6 पक्का घर है बुध और केतु।
*खाना नंबर 7 पक्का घर है बुध और शुक्र ।
*खाना नंबर 8 पक्का घर है मंगल व शनि ।
*खाना नंबर 9 पक्का घर है बृहस्पति का ।
*खाना नंबर 10 पक्का घर है शनि का ।
*खाना नंबर 11 पक्का घर है बृहस्पति ।
*खाना नंबर 12 पक्का घर है बृहस्पति और राहु का।       
                                
नोट-जब बृहस्पति ख़ाना नम्बर 9 में हो तो ख़ाली  ख़ाना नम्बर 12 का मालिक राहु होगा । बुध जब ख़ाना नम्बर 3 में हो तो खाली ख़ाना नम्बर 6 का मालिक केतु होगा। । अगर बृहस्पति ख़ाना नम्बर 12 या 9 दोनोँ किसी ख़ाने में न हो तो ख़ाली ख़ाना नम्बर 12 का मालिक बुध होगा (यानि की राहू +बृहस्पति की मिलावट से पैदा होने वाला बुध ) । अगर बुध ख़ाना  नम्बर 3 या 6 में से किसी जगह भी न हो तो ख़ाना नम्बर 6 का मालिक बुध केतु में से जो भी ग्रह जन्म कुंडली में उम्दा अच्छा नेक मज़बूत हो वही मालिक होगा - ख़ाली खाना नम्बर 6 का मालिक बुध और ख़ाली खाना नम्बर 9 का मालिक बृहस्पति होगा । यह यह इल्मे ज्योतिष लाल किताब के मुख्य मूलभूत आधार नियम हैं इसे हमेशा याद रखें🙏🏼📕🌷

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इल्मे ज्योतिष लाल किताब में मंसूई ग्रह यानि दो ग्रह के सुमेल से पैदा होने वाला तीसरा ग्रह तीसरा

सभी लाल किताब ज्योतिष प्रेमी को नजूमी दलजीत की तरफ से नमस्कार।।
    आज हम चर्चा करेंगे मन्सुइ ग्रहों के बारे में लाल किताब में यह भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय हैं इसके बारे में किसी भी अन्य ज्योतिषीय ग्रंथों में कोई उल्लेखनीय मिलता है। मन्सुइ यानि की 2 ग्रहों के मिलाप /मिलावट  से पैदा होने  वाला ग्रह। लाल किताब के बुनियादी असूल सभी ज्योतिष शास्त्रों से बहुत ही अलग है ।
   इल्म ज्योतिष लाल किताब की विद्या को सीखते समय वैदिक ज्योतिष या अन्य कोई भी विद्या को दरकिनार रखना ही ठीक है अगर हम दोनों को मिक्स करके सीखने की कोशिश करेंगे तो हम कभी भी लाल किताब को अच्छी तरह से समझ नहीं पाएंगे ना ही सीख पाएंगे।।
     आगे सीखते हैं कि कौन से दो घरों को मिलने पर कौन सा तीसरा ग्रह पैदा हो जाता है।।
 
सूरज +शुक्र =बृहस्पति

बुध +शुक्र =सूरज

सूरज +बृहस्पति= चंद्र

राहु +केतु =शुक्र

सूरज+ बुध= मंगल नेक

सूरज+ शनि =मंगल बद(मंगल बद भी राहू नीच माना है )

बृहस्पति +राहु =बुध

शुक्र +बृहस्पति =सनीचर (केतु स्वभाव)

मंगल +बुध= सनीचर (राहु स्वभाव)

मंगल नेक+ शनि राहु (उच्च * मंगल नेक हो तभी ऊँच)

सूरज +शनि =राहु (नीच मंगल बद स्वभाव का )

शुक्र +शनि= केतु (उच्च)

चंद्र +शनि =केतु (नीच)

मंसूई /बनावटी ग्रहों का लाल किताब में बहुत ही महत्व है- जितने भी लाल किताब के उपाय होते हैं उसमें से तकरीबन 80% उपाय इसी सिद्धांत का आधारित है कि हर ग्रह के दो हिस्से होते हैं एक अच्छा होता है एक बुरा होता है । मसलन्  किसी का शुक्र खराब हो रहा हो तो राहु +केतु मिलकर ही शुक्र का रूप धारण करते हैं । इसमें राहु का असर बुरा माना है केतु का असर अच्छा माना है राहु को हटाने के लिए राहू से सबन्धित वस्तुओं का दान (मूली धर्मस्थान में )करने से शुक्र को राहत मिलेगी ।।
      मन्सुइ ग्रह का कॉन्सेप्ट से इस इल्मे ज्योतिष लाल किताब की गहराई  को समझने का दरवाजा खुलता है। इसे बखूबी जेहन में बिठा लेंवे।।
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