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जब ग्रह खुद भी बन जाते हैं बलि के बकरे


इल्म ज्योतिष लाल किताब के सभी प्रेमियो को नजूमी की तरफ से नमस्कार


आज हम बात करेंगे कुर्बानी के बकरे की

लाल किताब में कुर्बानी के बकरे का यह बहुत ही अनोखा नियम है जो कि किसी भी अन्य  पद्धति में देखने को नहीं मिलता। कुर्बानी के बकरे से मतलब है जब कोई ग्रह अपने दुश्मन ग्रह से पीड़ित होता है तो वह अपना मन्दा प्रभाव  दूसरे ग्रह के फल के अशुभ हो जाने से प्रकट होता है जिस ग्रह के द्वारा वह अपना अशुभ प्रभाव प्रकट करता है उसे लाल किताब ज्योतिष में कुर्बानी का बकरा का माना  है ।
उधारण की तौर पर जिस कुंडली में शनि सूरज से पीड़ित हो उस कुंडली में शुक्र (पत्नि का कारक )के फल मन्दे मिलेंगे यानी कि जातक की पत्नी की सेहत अच्छी ना होगी या संबन्ध अच्छे न रहेंगे - यहां पर शुक्र कुर्बानी का बकरा माना जाएगा -जैसे उदाहरण के तौर पर लाल किताब में लिखा है सूरज खाना नंबर 6और सनी खाना नंबर 12 में हो तो औरत पर औरत मरती जाए ।

इसी तरह से सभी ग्रहों ने अपने बचाव के लिए किसी न किसी ग्रह का सहारा लिया हुआ है। आएं इसे अध्ययन करने की कोशिश करते हैं
★बुध  ने अपने बचाव के लिए शुक्र से दोस्ती कर रखी है बुध अपना दुष्प्रभाव शुक्र के जरिए प्रगट करेगा यानी अपने दोस्त शुक्र पर बला डाल देगा ।

★मंगल पीड़ित होने पर अपना मन्दा फल केतु द्वारा प्रकट करेगा यानी जातक की जो औलाद है वह मंदी होगी या वह बच्चा बीमार रहेगा औलाद होकर मर जाना मंगल बद की निशानी है ।

★आगे बात करते हैं शुक्र की शुक्र पीड़ित होने पर अपना दुष्प्रभाव चंद्र के द्वारा प्रकट करेगा यानि की कुंडली में अगर चंद्र और शुक्र टकराव पर हो तो जातक की माता की नजर कमजोर होगी या मां की सेहत अच्छी ना होगी या मां बेटे दोनों में वैचारिक मतभेद कटुता रहे।

★बृहस्पति पीड़ित होने पर  दुष्प्रभाव केतु के द्वारा ज़ाहिर  करेगा- माना कि किसी के कुंडली में बृहस्पति खाना नंबर 5 में हो और केतु भी किसी घर में हो तो बृहस्पती  के पीड़ित होने पर यानी खाना नंबर 5 में बृहस्पति मन्दा होने पर औलाद पर  जोकि खाना नंबर 5 का कारक है पर कोई अशुभ प्रभाव  तो नहीं होगा पर खाना नंबर 6 जो केतू अपना घर है  खाना नंबर 6  संबंधित रिश्तेदार चीजें आदि पर अपना दुष्प्रभाव प्रकट  करेगा यानी ऐसी हालत में जातक के मामा को परेशानी रहे ।

★आगे बात करते हैं सूरज की सूरज भी मुसीबत के वक्त अपना मंदा प्रभाव केतू के द्वारा प्रकट करेगा ।

★चंद्रमा अगर मंदा हो तो अपना प्रभाव अपने दोस्त ग्रहों 【बृहस्पति सूरज मंगल 】के द्वारा दुष्प्रभाव प्रकट  करेगा।

★ आगे बात करते हैं सनी की अगर सनी पीड़ित मंदा हो तो ऐसे में सनी ने दुश्मन से बचाव के लिए राहु केतु दोनों को सनीचर ने अपना एजेन्ट बनाया है सनी की जगह फौरन किसी दूसरे की कुर्बानी देते हैं यानी राहु केतु जो भी कुंडली में ग्रह उनकी नजर में हो या कमजोर हो उसकी कुर्बानी ले लेगा ।

★राहु केतु खुद ही मन्दे हो तो इन दोनों के हालात इन दोनों ग्रहों के अपने ही संबंधित चीजों से रिश्तेदार द्वारा मन्दा प्रभाव प्रकट होगा यानी कि राहु केतु अपना पाप खुद ही निभाते हैं यानि खुद की कुर्बानी दे देते हैं-मन्दे हो जाते हैं।

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