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लाल किताब अनुसार अंधी कुंडली- आधी अन्धी कुंडली धर्मी कुंडली नाबालिग कुंडली क्या होती है



इल्मे ज्योतिष लाल किताब के सभी प्रेमियों को नजूमीजी  की तरफ से नमस्कार ।
आज हम बात करेंगे ग्रहों की परिभाषा व् इल्मे ज्योतिष लाल किताब में क्यों कुंडलिया की प्रकार बताई गई है।
लाल किताब में इस तरह जिक्र है ।
*अंधी कुंडली
अगर खाना नंबर 10 में दो आपसी शत्रु या नीच ग्रह बैठे हो तो ऐसे कुंडली अंधी कुंडली की गिनती में आती है। यानि ऐसी कुंडली में जो ग्रह बैठे होते हैं वह अंधे ग्रहों की तरह अपना फल देते हैं यानी पूरी तरह फल देने में नाकामयाब रहते हैं।
*अंधराती कुंडली
आइए अब हम बात करें दूसरी प्रकार की कुंडली कि जिससे लाल किताब में अंधराती कुंडली बोला गया है। जब सूरज खाना नंबर 4 में हो और सनी खाना नंबर 7 में हो तो ऐसी कुंडली आधी अंधी होती है।
*धर्मी कुंडली
और तीसरे प्रकार की कुंडली की बात करें जिन्हें लाल किताब में धर्मी कुंडली के नाम से याद किया है  शनि राहु केतु तीनो ही पापी ग्रह की गिनती में आते हैं जब राहु केतु खाना नंबर 4 में पाप छोड़ने की चंद्र के सामने कसम उठाते हैं और शनिचर खाना नंबर 11 में बृहस्पति को साक्षआत समझकर राहु केतु के पैदा किए गए पापों का निर्णय करता है अगर राहु केतु ख़ाना नंबर 4 या चंद्र के साथ किसी भी घर में हो और अगर सनी खाना नंबर 11 में या बृहस्पति के साथ किसी भी घर में हो तो उस कुंडली में हो तो पापी ग्रह का बुरा प्रभाव ना होगा । पाप ग्रह जो हैं वह भी धर्मी के जैसा फल देंगे यानी बुरा फल ना देंगे अपनी अशुभता छोड़ जाते हैं।
साथी ग्रह कुंडली
आइए अब हम आगे बात करें साथी ग्रह वाली कुंडली की जब कोई तरह आपस में अपने निर्धारित राशि ऊंच-नीच घर की राशि आपने पक्के घरों में दल बदलकर बैठ जाए तो साथी ग्रह कहलाते हैं उदाहरण के तौर पर सूरज अपने घर की राशि का नंबर 5 में है और सनी अपने घर की राशी खाना नंबर 10 में है अब सूरज खाना नंबर 10 में और सनी ख़ाना नंबर 5 में हो तो दोनों ग्रह आपस में साथी ग्रह बन गए यानी दोनों एक दूसरे के घर में बदल कर बैठ गए गए ऐसे में दोनों में जो दुश्मनी भाव था वह खत्म हो गया ।
बिलमुक़ाबिल कुंडली (आमने सामने)
  आइए अब हम आगे बात करें बिलमुक़ाबिल कुंडली की यानी कि आमने सामने की कुंडली ।
दो मित्र ग्रह हो और जब दोनों में से किसी एक की जड़ में/ पक्के घर में उनका कोई शत्रु बैठ जाए तो उन दोनों ग्रहों की आपसी मित्रता में काफी कमी आ जाती है उनमें दुश्मनी का भाव पैदा हो जाता है ।उदाहरण के तौर पर सूरज अगर खाना नंबर 7 में बैठ जाए जो कि शुक्र की तुला राशि है और बुध जो कि शुक्र का मित्र है और सूरज का भी मित्र है में दुश्मनी का भाव पैदा हो जाएगा।यानि की सूरज के शत्रु शुक्र के घर बैठ जाने के कारण बुध जो की सूरज और शुक्र दोनों का मित्र है पर अब इस स्थिति में बुध व् शुक्र दोनों आपस में शत्रु बन गए दोस्ती का भाव जाता रहा।
*नाबालिग कुंडली
लाल किताब ज्योतिष में अगर कुंडली में केंद्र स्थान यानी कि खाना नंबर 1 4 7 10 खाली हो या इन खाना नंबर में सिर्फ पापी ग्रह बैठे हैं यानी की शनि राहु या केतु
*शुक्र के साथ बृहस्पत या सूर्य या चंद्र जा  राहु बैठा हो
*सनी के साथ सूरज या  चंद्र या मंगल
* राह के साथ सूरज या चंद्र या मंगल या बृहसप्त
*केतु के साथ सूरज या चांद जा मंगल हो या
*खाना नंबर 1 7 4 10 में बुध अकेला बैठा हो तो ऐसी कुंडली को नबालिक माना जाता है।

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